Monday, 16 March 2015

अब तुम आओगे


चाँद को निहारते रात  गुज़र गयी
कि अब तुम आओगे
तारों की झिल-मिल से भी पूछा
कि कब तुम आओगे

पत्ते भी खुसफुसा रहे थे,
मेरे प्यार को पागलपन बता रहे थे
कहा मैंने , दिखा दूँगी सबको,
जब तुम आओगे

हवा भी सरसरा कर हँसी
और कहा... करो इंतजार!!
तुम नहीं आओगे
मैंने भी कह दिया, मुझे है ऐतबार.....

दरवाजों को आजमाया
कही खुल न पाये हो..
उसने इशारा किया..
कही और उनकी न राहें हो

कहा मैंने होगी सबकी शिकायत  ,
जब तुम आओगे....
सबने हँस कर कहा
हम भी देखे ! कब तुम आओगे.........

आगये तुम!! आहटों ने चौंकाया...
ऐसे कई-कई बार मेरा मज़ाक बनाया

खयालों में  कई बार नाराज हुई..
और कई बार तुमने मनाया....
देरी से आने का बहुत बहाना बताया
वादा किया की अब  न कभी मुझे  छोड़ यूँ जाओगे..

सूरज ने रौशन किया सवेरा
रात यूँही निकल गयी
राह ताकि इन आखों ने,
कि अब तुम आओगे,कि अब तुम आओगे

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