Saturday, 18 March 2017

बीत गयी वो भोर

Woman Accepts Christ After 'Pleasant' Atheism

फिर वो भोर देखनी है
किरणों से घर रोशन होता था
जब कोयल राग सुनाती थी
कू-कू करके बच्चे उसके पीछे-पीछे गाते थे
वो अम्मा मंदिर से आती थी
और सुबह-सुबह ही जंगले से 
सबकी राम-राम हो जाती थी
चिरैया और गिलहरियाँ साथ कलेवा खाती थी
चूँ-चूँ  चीं-चीं की बातें मन को लुभाती थी
छकलते हुए  पानी की आवाज़
एक ऊर्जा मन में दे जाती थी
वो पानी में सूरज की किरणें
सब सोनेसा कर जाती थी
पत्तों पर जब ओस की बूंदे
मोती सी दिखलाती थी
छत पर वो पेड़ो की छांव में 
फुर्सत के पल बिताती थी
प्रेम से गुदगुदाते पल
कागज़ पर उकेर जाती थी।
फिर वो भोर देखनी है।

Thursday, 9 February 2017

बहुत याद आती है



माँ तू बहुत याद आती है,
तवे से उतरती रोटी हमें खिलाती है,
और खुद ठंडा निवाला खाती है
माँ तू बहुत याद आती है,

सोती नहीं रातो को,
और हमसे पहले उठ जाती है
थकी हुई आँखों से भी,
सिलती कपड़े , बेटियों को सजाती है
माँ तू बहुत याद आती है

अपने सपनों को तोड़
हमें नींद से जागती है,
और हमारे सपनो को पूरा करने में
अपनी जी-जान  लगाती है
जाने तेरी कितनी ख़्वाहिशें 
सूली पर चढ़ाती है,
फिर हँसते हँसते हमसे कदम मिलाती है
माँ तू बहुत याद आती है

छोटी थी तब डरती थी
कहती कुछ, कुछ करती थी 
जब तू गुस्से से लाल होती थी,
अब सहेली बन जाती है,
माँ तू बहुत याद आती है

जब तबियत ढीली होती है,
बस आँखें सीली होती है,
दुखती हुई रग् ,कोई बूझता नहीं,
तुझे याद कर लूं और कुछ सूझता नहीं
कोई दर, मंज़िल मुझे भाती है,
बस तू ही तू ज़हन में रह जाती है
माँ तू बहुत याद आती है।

Sunday, 21 August 2016

My Little Man



You are the only Man,
Whose love is so true,
My looks don't matter to you,
My ugly bun is ok too ,
What I wear, it doesn't bother you.
It makes me glad, when I see you smile...
It makes me mad, when am not with you for a while...
Everyday your laughters and giggles,
Everyday our cuddles and sniggles...
Turned my life blazed and bright,
When you look into my eyes ,
And your Lil hands hug me tight,
I feel so special at every sight...


My Lil Adorable Man Shaurya Bhavin Vora, Blessed to have You...

Wednesday, 18 May 2016

संग चलूंगी -आगे बढ़ूँगी

रूकूँगी, डरूंगी
और यूँ ही आगे बढ़ूँगी
मैं ढाल हूँ परिवार की,
बस यूँ ही रक्षा करूंगी
संग चलूँगी,संग बढ़ूँगी

हो संघर्ष, तो क्या ये ज़िन्दगी
हो कर्ष, तो क्या है बंदगी
तू झरना, मैं तेरी धार हूँ
तू कश्ती, मैं पतवार हूँ


तू है सहारा--ज़िन्दगी,
तू है बाहर- -ज़िन्दगी,
तेरे बिन मैं कुछ भी नहीं
तू तलवार मैं तेरी धार हूँ

डारूंगी बस चलूँगी
और यूँ ही आगे बढ़ूँगी।


मेरा सूर्य तू, मैं दिया तेरा
मेरा शौर्य तू, मैं धैर्य हूँ
मेरा पर्व तू, मेरा सर्व तू,
हर उलझन में मैं तेरे संग हूँ


मेरा बादल है तू, मैं पानी तेरा
सागर की इन लेहरों सी मैं
तू ही किनारा मेरा है
तुझ पे ही आकर मिलूंगी

डरूंगी बस चलूँगी
और यूँ ही आगे बढ़ूँगी।


तू इक आँख, मैं दूजी हूँ
तू इक हाथ मैं दूजा हूँ
तू धड़कन है, मैं साँसे तेरी
ये साथ है इक दूजे का।


मत डरता जा, तू करता जा,
बस यूँ ही आगे बढ़ता जा,
मैं ढाल हूँ परिवार की,
संग चलूंगी -आगे बढ़ूँगी

Sunday, 17 April 2016

अधूरा - सा लगता है




तुझ बिन सब अधूरा - सा लगता है
तू हो तो मन मेरा पूरा- सा लगता है
किसी किसी बहाने से, कोई पुकारता नहीं,
आखों से तकरार अभी होती नहीं,
गुस्से से प्यार कोई करता नहीं,
झगडे और नोक-झोक में खोती नहीं,
झूठ-मुठ का गुस्सा अभी होती नहीं,
तेरे बिन मेरे दिल को थोड़ा बुरा- सा लगता है
तकिये के गिलाफ़ पर, सिलवटें नहीं,
चादर भी कोई अभी खींचता नहीं,
रातों को उठ-उठ कर मुझे देखता नहीं,
करवटों की आहटों से नींद खुलती नहीं
इन्ही यादों में अब आँखें बंद होती नहीं
मेरा ये कमरा भी कोरा-सा लगता है
सुबह- सुबह उठने को मैं सुनाती  नहीं,
अखबार की तहें भी अभी खुलती नहीं,
दिन-भर की कहानियाँ किसी को बताती नहीं,
हर-पल की बाते, किसी को सताती नहीं,
मन से तेरी यादें कहीं जाती नहीं,
तेरे बिन चाँद भी तारा सा लगता है

तुझ बिन मुझे सब अधूरा - सा लगता है
तू हो तो मन मेरा पूरा- सा लगता है