Monday, 3 July 2017

ख्वाहिशें


ख्वाहिशें
 

अलादीन का  कालीन लेकर 
धरती का चक्कर लगाऊं 

सातों समंदर  में जाकर ,
सीपी से मोती लाऊँ 

पंछी-से पर लगाकर 
बादलों की सैर कर आऊं 

रंग बिरंगे फूलों पर 
भवरों सी मैं मँडराऊँ 

जंगल में शेरों-सा 
राजा बन टहलाऊँ

परियों के मेलों में जा 
पारी-सी कहलाऊँ 

मग्न होकर आसमाँ  में 
उनके गीत गुनगुनाऊँ  

रातों को जो चाँद निहारा 
उसको छू कर आऊं 

सारे तारे चुन-चुन कर 
अपनी टोकरी भर लाऊँ 

इक-इक तारा सबको देदूं 
घर-घर रौशन कर आऊं 

इसके घर भी , उसके घर भी 
खुशियों के दीप जलाऊँ | 



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